अपनी फसल की समस्या पहचानें और सही समय पर सही निर्णय लें
Black Root
लक्षण:
जड़ें काली पड़ जाती हैं।
पौधे पीले और कमजोर हो जाते हैं।
बढ़वार रुक जाती है।
पौधे आसानी से उखड़ जाते हैं।
उपचार:
खेत में पानी का निकास अच्छा रखें।
Thiophanate Methyl 70% WP @ 1 ग्राम/लीटर पानी या Carbendazim 50 WP @ 1 ग्राम/लीटर पानी से ड्रेंचिंग करें।
Trichoderma का प्रयोग करें।
👉 समय पर पहचान और उपचार से नुकसान कम किया जा सकता है। 🌾
लाल सुलाई (Red Worm)
लक्षण:
धान की जड़ों के पास पानी में लाल रंग के कीड़े दिखाई देते हैं।
पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है।
पौधे कमजोर और पीले पड़ सकते हैं।
उपचार:
खेत में पानी का उचित प्रबंधन रखें।
अधिक प्रकोप होने पर Lambda-cyhalothrin या Chlorpyrifos युक्त कीटनाशक का प्रयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह अनुसार करें।
👉 समय पर नियंत्रण करने से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। 🌾
झंडा रोग ( Bakanae Disease)
लक्षण:
पौधे असामान्य रूप से लंबे और पतले हो जाते हैं।
पौधों का रंग हल्का हरा या पीला दिखाई देता है।
प्रभावित पौधे कमजोर होकर गिर सकते हैं।
कई पौधों में बालियां नहीं बनतीं या दाने कम बनते हैं।
कारण:
यह एक फफूंद जनित रोग है, जिसका मुख्य कारण Fusarium fujikuroi है।
संक्रमित बीज से इसका फैलाव होता है।
उपचार:
केवल स्वस्थ एवं प्रमाणित बीज का प्रयोग करें।
बीज उपचार के लिए Carbendazim 50 WP @ 2 ग्राम/किग्रा बीज या Thiophanate Methyl 70 WP @ 2 ग्राम/किग्रा बीज का उपयोग करें।
रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट करें।
👉 मुख्य पहचान: यदि धान के कुछ पौधे बाकी पौधों से बहुत ज्यादा लंबे, पतले और कमजोर दिखाई दें, तो यह बकाने (झंडा) रोग हो सकता है। 🌾
गोभ की सुंडी व लीफ फोल्डर
लक्षण:
बीच वाली पत्ती सूखकर आसानी से निकल जाती है (Dead Heart)।
बाली सफेद रह जाती है (White Ear)।
पत्तियां मुड़ जाती हैं और उन पर सफेद धारियां दिखाई देती हैं।
पौधे की बढ़वार और उपज प्रभावित होती है।
उपचार:
Chlorantraniliprole 18.5 SC @ 60 मिली/एकड़ का छिड़काव करें।
अधिक प्रकोप होने पर Flubendiamide 39.35 SC @ 60 मिली/एकड़ या Lambda-cyhalothrin 5 EC @ 200 मिली/एकड़ का प्रयोग करें। 🌾
Blast Rog
लक्षण:
पत्तियों पर आंख (Eye) के आकार के भूरे धब्बे बनते हैं।
रोग बढ़ने पर पत्तियां सूखने लगती हैं।
बाली की गर्दन (Neck) काली पड़ जाती है और दाने नहीं भरते।
अधिक प्रकोप होने पर उपज में भारी कमी आती है।
उपचार:
अधिक प्रकोप होने पर Azoxystrobin + Tebuconazole या Isoprothiolane का प्रयोग करें।
👉 ब्लास्ट धान की सबसे नुकसानदायक बीमारियों में से एक है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही नियंत्रण करें। 🌾
Sheath Blight
लक्षण:
पत्तियों की खोल (Sheath) पर भूरे रंग के अंडाकार धब्बे बनते हैं।
धब्बे बढ़कर आपस में मिल जाते हैं।
रोग नीचे से ऊपर की ओर फैलता है।
अधिक प्रकोप होने पर पत्तियां सूख जाती हैं और उपज घट जाती है।
उपचार:
Azoxystrobin + Tebuconazole का छिड़काव करें।
या Nativo (Tebuconazole 50% + Trifloxystrobin 25% WG) @ 120-150 ग्राम/एकड़ का प्रयोग करें।
👉 शुरुआती लक्षण दिखते ही छिड़काव करने पर रोग पर अच्छा नियंत्रण मिलता है। 🌾
बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (BLB)
लक्षण:
पत्तियों के किनारों से पीलापन शुरू होता है।
पत्तियां धीरे-धीरे सूखकर भूरे रंग की हो जाती हैं।
रोग तेजी से फैलता है, विशेषकर बारिश और तेज हवा के बाद।
अधिक प्रकोप होने पर उपज प्रभावित होती है।
उपचार:
Streptocycline @ 0.5 ग्राम का छिड़काव करें।
साथ में Azoxystrobin + Tebuconazole या Nativo (Tebuconazole 50% + Trifloxystrobin 25% WG) का छिड़काव किया जा सकता है, यदि खेत में फफूंद जनित रोग (जैसे ब्लास्ट, शीथ ब्लाइट आदि) का भी खतरा हो।
फॉल्स स्मट (कंडवा रोग)
लक्षण:
दानों की जगह हरे, पीले या नारंगी रंग की गोल गांठें बन जाती हैं।
बाद में ये गांठें काली पड़ जाती हैं।
प्रभावित दाने नहीं भरते, जिससे उपज और गुणवत्ता प्रभावित होती है।
उपचार:
Isoprothiolane 40 EC @ 400-500 मिली/एकड़ का छिड़काव करें।
साथ में Nativo (Trifloxystrobin 25% + Tebuconazole 50% WG) @ 120-150 ग्राम/एकड़ का प्रयोग करें।
संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन का प्रयोग करें।
👉 बाली निकलने से पहले या शुरुआती अवस्था में स्प्रे करने पर सबसे अच्छे परिणाम मिलते हैं। 🌾